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Hymn No. 330 | Date: 04-Sep-1998
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मन में प्यार का जो दीप जलाया तूने, सतत् जलनें देना प्रभु ।
मन में प्यार का जो दीप जलाया तूने, सतत् जलनें देना प्रभु ।
होम कर दूंगा इस तन को उसमें, तेरी कृपा से बुझने ना दूंगा।
प्रयत्न करूंगा हर बार तेरा नाम लेकें, उसमें खुद को देखुंगा ।
भीतर ही भीतर जब फैलेगा, उसका उजियारा, छंट जायेगा मन का अंधीयारा।
उसकी नहाई रोशनी में इस जग को देखूंगा, हर इक् से प्यार करूंगा।
ढूंडूंगा तूझे इस रोशनी के सहारे अपने भीतर और जग में ।
उस छोटे से दीप से होगी प्यार ही प्यार की बरसात तेरी दया से।
खुद भी नहाऊंगा, हर इक् को भीगाऊँगा उसमें।
जो भी आड़े आयेंगा, वह वह जायेगा प्यार में ।
बलिहारी होगी तेरे नाम की, कई - कई जनमों के प्यासे पीयेंगे इस जाम को ।
बेपरवाह होगे हम सब कूछ से, डूबे रहेगे तेरे प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह