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Hymn No. 331 | Date: 04-Sep-1998
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तेरे नाम की महिमा अबूझ अपरंपार है, फिर तेरा क्याँ कहना ।
तेरे नाम की महिमा अबूझ अपरंपार है, फिर तेरा क्याँ कहना ।
रोम – रोम झनझना उठें जब दिल में गूंजे तेरा नाम पलक समय का ना रहता था।
तेरा नाम लेकें तर गये कीतनें ऋषि – मुनि, रमतें ही खो जातें है तुझमें ।
तेरा नाम लेनें से बढके कोई काम ना है, जिसनें ये जान उसको सब ने माना ।
नाम के सहारें तेरे पहूचें हर कोई तूझ तक, जिसनें तेरा नाम लिया उसको सुझा सब कुछ ।
तेरे नाम से बडा कोई ना मंत्र है, जिसनें जपा उसे हर भवबंधन को पार किया।
तेरे नाम के सहारें जीवन की हर बाधा को पार करकें पहुचेंगे हम तूझ तक।
तेरे नाम के शरण में जो गया, उसका ख्याल तूने हर पल किया।
जिसनें तेरे नाम की लड़ी से अपने कंठ को सजाया हर पल तुझको पास अपने पाया।
तेरा नाम कूछ ना होके सब कूछ है वही अनादि, अनंत, अकाल, अनित्य है ।


- डॉ.संतोष सिंह