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Hymn No. 334 | Date: 05-Sep-1998
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शक्ति दें इतनी कर सकूं भक्ति में तेरी,
शक्ति दें इतनी कर सकूं भक्ति में तेरी,
ज्ञान दें इतना बस भान करता रहूँ सब तरफ मैं तेरा।
प्रेम दें इतना रिझा सकूं मैं तूझे;
दया करना तू इतना हमपे, भटके ना हमारें कदम ।
रूपवान न बनना है, मुझे तो ढलना है तेरे अनुरूप।
वहीं कार्य करता रहूँ जो करनें को प्रेरित करें तू मुझे ।
बुध्दि हीन रहूं, शर्म हया से उपर होके, तूझे याद करके मुस्कराऊँ सदा,
मेरी अदा हो बस तूझे लुभानें के लिये ।
हर लमहाँ गुजरें तेरे ख्यालों में बिन गुजारें;
तडपता रहूँ तेरे पास आनें के लिये, आते – जाते तेरे गीतों को गाता रहूँ ।
झुंक – झुककें मैं करू सबको प्रणाम तूझे समझकें;
नशा करता रहूँ बस तेरे नाम का;
दिन – रात का ना ख्याल करूं, बस बेहाल रहूं तेरे लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह