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Hymn No. 337 | Date: 07-Sep-1998
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नजर ना लगें तूझे मेरी, तू सबसे प्यारा है लगता हम सबको;
नजर ना लगें तूझे मेरी, तू सबसे प्यारा है लगता हम सबको;
तेरे आगे कीसी की ना है चलती, फिर भी तू देता है चलनें सबकी।
हर कोई मान – सम्मान देता है तूझे, अर्पीत करतें प्यारी से प्यार को तूझे;
तूझे खुश करनें की कोशीश में हर कोई रहता है बैचेन।
लगाव तुझसे है सबका इतना, सब कूछ भूलाकें तेरा स्मरण करते है,
खुद को तेरे श्री चरणों में झुकानें को रहते है हर पल तैयार ।
तेरी हर बात को ब्रम्ह वाक्य मानकें कर गुजरनें को रहते है तैयार,
अमिट उनकी श्रध्दा है तुझमें, सागर से भी गहरा विश्वास तुझमें ।
लगन उनकी इतनी है, तेरे लिये खुद को साथ लेतें है;
मैं मुरख नत – मस्तक हूँ अपने प्रिय भाइयों का प्यार देखकें ।
सीखना है मुझे बहुत कूछ तेरी कृपा से उनकें साथ रहके;
मुझे कुछ दें या ना दें पर तेरी भक्ति करूं, और सेवा करू तेरे भक्तों की।


- डॉ.संतोष सिंह