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Hymn No. 341 | Date: 08-Sep-1998
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ना मुझे कीसीका मान बढाना है, ना ही यशोगान है करना,
ना मुझे कीसीका मान बढाना है, ना ही यशोगान है करना,
मुझें तो मेरे प्यारें श्री का नाम है लेना, जब तक दम रहे मुझमें ।
जो भी करेंगा वही करेगा, हर हाल में मुझको बस खुश रहना है ।
बनकें भी ना बन पाऊँगा में कीसी का, मुझको तो बस उसका बनना है।
चूका - चूका के कभी ना चूका पाऊँगा, उधार उसका है हमपे इतना;
जो भी मिला उसकी कृपा से मिला, अर्पित कर देना है सबकूछ उसके चरणों में ।
कीतनें आयेंगे मैं – मैं करके, कीतने जायेगे मैं – मैं करते, मालिक तो बस वो इक् रहेगा;
तोड़ना होगा आज नहीं तो कल हर इक् बंधन को बंध जान होगा उसके बंधन में ।
नाम तू उसका आज नहीं तो कल हर इक् बंधन को बंध जान होगा उसके बंधन में ।
हर पल तुझको याद आयेंगा तो, उसको तू अपने करीब पायेंगा,
गीत रचेंगा वो तू – लिखता चला जायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह