VIEW HYMN

Hymn No. 343 | Date: 09-Sep-1998
Text Size
जब मची हो हलचल दिल में हर पल, तो तूम्हारी याद है सताती।
जब मची हो हलचल दिल में हर पल, तो तूम्हारी याद है सताती।
नित्य नयें – नयें खाँब देखुँ खुली आँखो से, बेहाल हूँ मैं इतना ।
बेकरार हूँ मैं तेरे लिये, दुनिया की ना है मूझे खबर, बेखबर तो मैं अपने आप से है ।
कब से हूँ राह देखता में तेरा, बदल चूका हूँ कीतना चोला थकना मूझे मंजूर नहीं ।
हसरत भरी निगाहें से मैं हूँ तूझे देखता, रूखसत करनें का जी ना है करता ।
जो तेरे दर पे सर झुकाया वो तो सदा झुका रहेगा, जो तू सर मांग लें ना हटेंगे हम पेछे।
प्राण को जान है तो जाये, जा – जाकें कहाँ जायेगी, जब तू ही है हम सबका प्राणनाथ।
डर तो निकल चूका है, अंग के रोम – रोम में है, रोमांच तेरे संग होने का।
इस मस्ती को कौन है भंग कर सकता, जब हम भूल गये है खुदको तुझमें खोकें ।
अपनो तो हर वो बिरादर है जिसमें दर्शन किया तेरा, उँढच-नीच का क्या करना।


- डॉ.संतोष सिंह