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Hymn No. 345 | Date: 10-Sep-1998
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प्रभु देना है तो दें दे मुझे तेरी भक्ति, मन में तो कई बार संताप है जनमते,
प्रभु देना है तो दें दे मुझे तेरी भक्ति, मन में तो कई बार संताप है जनमते,
पर तेरे आनंद में हम सब कुछ है भूल जाते, जीवन के उतार - चढाव आज नहीं तो कल पाँर हो जायेगे।
समय बहुत कम है, अपनों से लगाव तो क्षणिक है, क्षण भर के सुख के आगें शाश्वत को क्यों त्यांगू।
होशीयारी की बात ना हूँ करता पर प्रेम की अविरल धारा में है सदा बहना ।
कहनां क्याँ है तुझसे तो तो सब कुछ है जानता, मदद कर मेरी इस तन-मन में बसा लें तूझे।
जो ना हो सका मैं तेरा तो कीसी का ना हो पाऊँगा जरूरत ना है तूझे मेरी पर मुझे जरुरत है तेरी।
लडाई बहुत किया दुनिया भरकें लोगों से, खूद स sलडना आता नहीं, पर तेरे लिये कूछ भी कर जाओंगे।
होशीयार बना दें तू मुझे इतना सहीं राह को पहचान सके निकड पड़t मैं उसपे तेरा नाम लेके।
थोडा कम ही सही पर प्रभु सदा से तूझे चाहा हूँ, प्राण घूट जाये, पर में प्रतिपल चाहूंगा तूझे।
दमा में ने खुद को कई बार दिया पर प्रभु में तुझको दगा नहीं दूँगा। आहट खूद को कर लूंगा।


- डॉ.संतोष सिंह