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Hymn No. 347 | Date: 11-Sep-1998
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जब से तूझे देखा है, दिल को कुछ हो गया,
जब से तूझे देखा है, दिल को कुछ हो गया,
रातों की नींद गायब है, दिन को भी चैंन ना है।
हर पल इस उदोड - बन में दिन है गुजरता,
तुझसे मुलाकात का कोई न कोई, बहाना हूँ ढूँढ़ता।
घायल है मेरा दिल, इलाज तू है जानता,
ठीक कर या दर्द दें, सब कुछ है तेरे हाथों में ।
कोई गिला – शिकवा ना है मुझे तुझसे, दोनों हाल में हम है खुश।
हर एक आह का शुक्रियां अदा करते है जा याद दिला जाती है हमें तेरी ।
घायल होने के बहानें तुझसे मिलनें का बहाना मिल जाता हें हमको।
मुझे ना होना है ठीक, जान निकल जात है तो जाने दे, इस बहानें को तू ना खतरा
तेरे दीदार के वास्ते कई - कई जख्मों को सह सकता हूँ इस तन पे।
तेरा दीदार ना हुआ तो तेरे चौखट पे इस सर को झुकायेंगे तो कभी ना उठायेंगे।


- डॉ.संतोष सिंह