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Hymn No. 349 | Date: 12-Sep-1998
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एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं कई - कई बार पुकारा करेंगे हम तूझे।
एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं कई - कई बार पुकारा करेंगे हम तूझे।
परवाह ना करेंगे तेरे आनें या न आनें का, हम तो बस तूझे पुकारा करेंगे।
तेरे न आनें का रंज क्यों रख मैं अपने मन मैं नजर बंद कर तूझे निहार लूंगा।
देख ना पाऊँ तूझे मैं अपने पास तो क्या से पर तू रहता है साथ हमारें हर पल।
लब से कहनें की क्या जरूरत है तुझसे कोई बात, तो तो मन की हर बात है जानता।
हर हाल में हम खुश रहना चाहते है, जीवन का हर पल गुजरता है तेरी रजामंदी से।
नागवार कोई बात ना होती है, ना ही नागवार लोग, नागवारी से भरा होता है हमारा मन
अच्छे के सिवाय कुछ ना होता है, अगर बुरायी समायी ना हो हमारी नजरों में।
कहर कौन बरपा सकता है हमपे, हमारी लालसायें कहर बरपाया करती है हमपे ।
कीसी ना कीसी का रहनुमा बननें के चक्कर में बनतें है जग हंसाई का पात्र,
रहनुमा तो बस वो क ही है ।


- डॉ.संतोष सिंह