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Hymn No. 351 | Date: 13-Sep-1998
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भूल जा तू सब कुछ, याद रख बस उसे, जो होना होगा होके रहेगा।
भूल जा तू सब कुछ, याद रख बस उसे, जो होना होगा होके रहेगा।
एक बार जो तू उसके शरण में गया, हर होनी – अनहोनी उसके मुताबिक घटेगा।
कर्म तू बनकें उसका तू करता जा, करकें तू उसे हर कर्म सौंपता जा।
कुछ भी हो जाये विश्वास रहे सदा उसपे, जो भी हो उसमें तू रह मजा में।
इक् थेला भी ना ले जायेगा साथ अपने, सब कूछ तो है उसका।
कुछ भी ना रह सकेंगा साथ तेरे, आज जो तेरा है कल कीसी और का होगा।
छींन जाये उससे पहले अप्रित कर दें तू उसे, अर्पित करनें में भी मजा है।
जहाँ भी दिखें कर उसे प्रणाम, धनभाग्य तू अपना मानना तूझे निमित्त बजाया।
हर दिन उत्सव मनाना, की उसनें नाम स्मरण करनें का तूझे अधिकार दिया।
खाक था तू, तूझे अपने चरणों में बैठनें दिया है उसने।


- डॉ.संतोष सिंह