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Hymn No. 352 | Date: 14-Sep-1998
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देखा नहीं तुझसा हमनें दिलबर अब तक, दुनिया भरकं गमों को समेटा तू दामन में अपने
देखा नहीं तुझसा हमनें दिलबर अब तक, दुनिया भरकं गमों को समेटा तू दामन में अपने
बांटा तूने हम सबको खुशीयों की सौगात, लियां तूने ना कीसी से कोई उपहार
प्यार किया तूने हम सबको बिन भेदभाव के, आत्मविश्वास से भर दिया तूने हमकों
इस जीवन को जीना तूने सीखाया, जीतें हुये जींदगी के हर पहलु को निभाना सीखाया।
दर – दर की ठोकरें खातें हुये भटक रहे थें हम, शरण मिला तेरे दर पे।
सिलसिला जो तूने शुरू किया प्यार करना, और प्यार से बदल देना हम सबको ।
क्या थें हम, और क्या बना दिया तूने, लोगों ने रत्नों को तराशा, तूने पत्थरों को तराश दिया।
आज तक सुन रखा था लोगों से और कीताबों में पड़ रखा था वो तूने हमको दिया।
शब्द अधुरें पड़ जाते हें तेरी चरचा के वास्ते, आंखे बंद करकें मौंन हे जाता हूँ।
चाहें तेरा प्रेम हो या क्यान, उसके आगे तू ही तू है और कूछ भी नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह