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Hymn No. 353 | Date: 14-Sep-1998
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अभी तो चलना शुरू किया है, मंजिल के बारें में क्यों सोचना।
अभी तो चलना शुरू किया है, मंजिल के बारें में क्यों सोचना।
राह तो अभी सही मिली है, पहुचंने की फिक्र क्यों करना।
रूकना नहीं बढतें जान, पानें और न पानें की परवाह ना करना ।
कृपा है उसकी मौका दिया है हमें उस हाथ से जाने ना देना।
चलना तो अकेले है, विश्वास करकें साथ सदा वो हमारें है ।
प्यारे तो सभी है, उससे प्यारा कोई नहीं यें अहसास दिल को हें दिलाना।
सही तो हम सब है हमारी मंजिल एक है, पर राहें अलग – अलग है ।
अलग – अलग चलकें भी रहेगे इक् – दूजें के नजदीक हम बनकें उसके मुरींद।
- डॉ.संतोष सिंह
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