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Hymn No. 354 | Date: 14-Sep-1998
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जब दिल में ज्योत जग गयीं उसके नाम की, गुलजार हो गया मेरा चमन ।
जब दिल में ज्योत जग गयीं उसके नाम की, गुलजार हो गया मेरा चमन ।
अंधियार छंट गया मन का, रूह का इक् – इक् हिस्सा रोशन हो गया।
डर जो था मन का काफूर हो गया, जिंदगी के हर पल में अच्छा – अच्छा होनें लगा।
प्यार पाकें वो बड़ेगा, आशीष उसकी बाती है, खूद ही नहीं सारबोर करेंगा सबको।
ज्यों – ज्यों दिल के तार उसके दिल से जुडता जायेगा, तन – मन का भेद मिटता जायेगा।
झुमेंगा वो झुमायेंगा सबको, दिल से तरानें की लहर उठेगी सबको भिगोता जायेगा।
मिटेंगे हम मिटेंगा ना वो, आम सुर्य के रूप में सदा मोजुद रहेगा।
जब मिट जायेगा यें तन –मन, तू उसको गोद में समा जायेगा।
रोशन होगे हम उसकी रोशनी की इक् कीरन बनकें ।
चारों और रोशन होगा रोशनी से कोई भी कहाँ रह जायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह