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Hymn No. 357 | Date: 15-Sep-1998
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मस्ती में कब तू आयेंगा, कीसको झुमां ले जायेगा,
मस्ती में कब तू आयेंगा, कीसको झुमां ले जायेगा,
कोई नहीं जानता, पर सब तूझे है मानतें ।
तेरे आनें के पहलें हवा में मस्ती आ जाती हें ।
जमें हो या आसमां बैचेन हो उठते है तेरे दीदार के लिये ।
रोकनां कीसीकें बस में नहीं रहता है जब तू साथ होता है ।
हर दिल मचल उठता है देखतें ही तूझें रोकेंगा कौन कीसें ।
पलक झपकतें गुजरता हें वक्त, जाने पे ख्याल आता है।
तरस मिटायें मिटती नहीं हमारी, वो तो दावानल बन चुकी है।
हो जायेगे सती हम प्यार के आग में, तेरा साथ पानें के लिये।
जीना मरना ना कूछ है हमारें हाथ में, हम तो होम हो चुके है तेरे मस्ती में।


- डॉ.संतोष सिंह