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Hymn No. 367 | Date: 18-Sep-1998
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बना दें हमकों अपने चरणों की धूल, सूधर जायेगी हमारी हर भूल ।
बना दें हमकों अपने चरणों की धूल, सूधर जायेगी हमारी हर भूल ।
खिल उठेंगे मन में तरह – तरह के फूल, तेरे मुरीदं बनकें ।
छाप है मन में न जाने कीस – कीस की, मिटा दें हर छाप मुस्कराकें तू।
दिल को मिलेगा प्यार से भरा साथी, जिसकें साथ होनें हर पल होगा जवाँ – जवाँ ।
आश ना रखता हा मैं कुछ भी तुझसे, प्यार में कोई कयास ना हूँ लगाता ।
हम तो बन चुकें है तेरे दीवानें कुछ पाना नहीं सिर्फ लुटाना है जानतें ।
दमदार नहीं हूँ मैं बाहर से इतना ठानां इक् बार को जो, करकें हूँ मानता ।
प्यार पानें के लिये तरा, हिम्मत रखता हूँ कुछ भी कर जाने की।
सवाल ना करना तू मुझसे कोई, आजमों के देखं लेना तू मुझें।
तेरा ईशारा है काफी, बस एतबार रखना, कर दिखाऊँगा मैं वो तूझे ।


- डॉ.संतोष सिंह