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Hymn No. 370 | Date: 20-Sep-1998
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ऱालत मेरी हो गयी है पागलों सी, पागल और मुझमें भेद करना बडा मुश्किल है ।
ऱालत मेरी हो गयी है पागलों सी, पागल और मुझमें भेद करना बडा मुश्किल है ।
यहीं हालत रही मेरी तेरे प्रति, मुमकीन नहीं लगता ठीक होना मेरा ।
हर हद को तोड़ देना चाहता हूँ, हर हद को पार कर जान चाहता हूँ तेरा बनने के लिये ।
असहाय हो जाता हूँ मन के आगे, दिल तो हो चूका है तेरा दीवाना ।
तन – मन कहीं और है जोर मारता, दिल तो है तेरे आगे – पीछे चक्कर लगाता ।
खुशीयों में भी अब है फर्क नजर आता, कुछ ना है सुहाता दिल को तेरे सिवाय ।
तडपता है दिल तेरे पास आनें के लिये, तन के पिजड़े में है छटपटाता ।
बेबस है वो आज इतना, बेबसी उदासी में बदल जाती है।
तेरे गीत राहत दे जाती है नयें सिरें से जन्म होता है हमारा ।
उसी के सहारें शुरूआत करते है हम मंजिल के लिये चल पड़ते है तेरा नाम लेकें ।


- डॉ.संतोष सिंह