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Hymn No. 377 | Date: 24-Sep-1998
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निवेदन करता हूँ मैं तुझसे ओ मेरे रहनुंमा, हिलोर के रख दें तू मुझे, अंदर ही अंदर झकझोर दें।
निवेदन करता हूँ मैं तुझसे ओ मेरे रहनुंमा, हिलोर के रख दें तू मुझे, अंदर ही अंदर झकझोर दें।
इस तन – मन पे चिपकें हुये इच्छाओं और दुर्गुणों के कन् को झटकार दें।
दिल पे छायें हुये गर्द को हटा दें, मैं अपने आप गानें लगूंगा गीत तेरा।
प्यार की आभा बिखरेगी, शुरूआत करूंगा मैं नई ।
अपनी चमक – दमक भक्ति कें बिखरेंगे लुभानें के लिये तूझकों ।
प्यार के नयें – नयें तरानें छेडूंगा, अपनानें के लिये तू विवश होगा हमें ।
बच्चों की तरह मस्ती करूंगा, चुहल बाजी के दौर चलेंगे तेरे संग ।
तूझे लेकें इतराता फिरूंगा, बस तेरे नजरों की इनायत चाहीयें हमें ।
सरूर चडा हागा हमपे जो तेरा, होश में न आना चाहते है हम ।


- डॉ.संतोष सिंह