My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 378 | Date: 25-Sep-1998
Text Size
जारी रहेगा कब तक तेरा खेल खेलनें का हमशें ।
जारी रहेगा कब तक तेरा खेल खेलनें का हमशें ।
तू कहता है तो मान लेतें है, हम खुद ही खेल खेलतें है खुदशें ।
खेल – खेल में हम कभी जीतते है हारते रहते है तुझसे ।
समझ नहीं आता क्यों यें खेल चलता रहता है ।
क्या सीखाना चाहता है तू हमें, क्यों भूल जाते है हम अपने में तूझे ।
न जाने कीसके – कीसके वश में है रहते है हम इच्छा, मोह, लोभ ।
इक् मैं अकेला उसपे भी जोर है चलला जाने, अंजाने कर्मों का ।
कूछ को टालते है, कुछ को पड़ता है सहना, रहना पड़ता है इन सबके संग ।
पता नहीं यें खेल है कैसा, जितना समझनें की कोशीश करता हूँ इतना ही उलझा जाता है ।
थकना नहीं चाहता ना ही हिम्मत हारना, तेर नाम लेतें हूयें – गुजारना चाहता हूँ जीवन के हर पल को।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
निवेदन करता हूँ मैं तुझसे ओ मेरे रहनुंमा, हिलोर के रख दें तू मुझे, अंदर ही अंदर झकझोर दें।
Next
लत लगा दें तू मुझे तेरी, कहीं भी रहूं दिलरहे मेंरा तेरे श्री चरणों में ।
*
*