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Hymn No. 379 | Date: 25-Sep-1998
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लत लगा दें तू मुझे तेरी, कहीं भी रहूं दिलरहे मेंरा तेरे श्री चरणों में ।
लत लगा दें तू मुझे तेरी, कहीं भी रहूं दिलरहे मेंरा तेरे श्री चरणों में ।
चैंन न आयें मुझे देखुं दिन – रात, जी ना भरें मेरा पागल होके फिरू तेरे पीछे ।
आसुओं के बूंदे बरबस बहते रहे तूझे देखतें ही छलक के चूम लें तेरे चरणों को ।
जब – जब दूर हुआ हूँ मैं तुझसे आहत होता रहा है मन मेरा तेरे लिये।
कैसे बताऊँ नाटक ना है, ये सच है, बेपनाह मोहब्बत करनें लगा हूँ तुझसे ।
कीसी भी रिश्तें – नातों में ना हें लगता मन मेरा, अब तो सब कूछ तू लगें ।
इतनी शिकवा – शिकायत प्रेम भरी बातें ना हूँ करता अपनी लालसाओं के लिये ।
बस तेरी सेवा में रहके अपना दिन गुजारना हूँ चाहता।
अनवरत यें क्रम चलता रहे, तू मेरा मालीक, मैं तेरा गुलाम रहूँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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