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Hymn No. 381 | Date: 25-Sep-1998
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प्रदीप्त हुआ है जो, हमारें दिलों में प्रेम का दीप । कृपा करना प्रभु तू अनवरत उसे जलतें रहनें देना ।
प्रदीप्त हुआ है जो, हमारें दिलों में प्रेम का दीप । कृपा करना प्रभु तू अनवरत उसे जलतें रहनें देना ।
उसकें उजालें मैं तुझको प्रभु हम निहारा करेंगे । तेरे अद्भूत लीलाओं का रस पान करेंगे ।
जो भी चक्कर है दुनिया का लगातें हुये तेर चक्कर लगायेंगे ।
तन – मन के विश्राम को त्याग कें, दिल ही दिल में बतीयाया करेंगे ।
जो भी करेंगे तेरा नाम लेकें गुणगान करेंगे ।
गलत तो जुड़ा है हमारें मन से, अच्छा के सिवाय ना है कूछ तेरे जगत में।
प्रेम करेंगे हमे तूझे, जो कूछ तू दे देगा स्वीकार करेंगे प्रसाद समझकें ।
हर भेद को तू मिटायेगा, भेद ना रखना है हमें कीसी से ।


- डॉ.संतोष सिंह