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Hymn No. 384 | Date: 26-Sep-1998
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मेरा प्रेमी तू है, तेरी याद आतें ही दिल की धडकन है बड जाती।
मेरा प्रेमी तू है, तेरी याद आतें ही दिल की धडकन है बड जाती।
मन मेरा लट्टू है तूझपे, घुमता है चारों और तेरे।
साथ पानें को तेरा बेताब रहता हूँ जैसे सुरज और सुरजमुखीं।
तेरा नाम सुनतें ही मन ही मन थिरकने लगता हूँ । हर पल संग तेरे जीना चाहता हूँ बनना पड़ें चाहे कुछ भी। असमर्थ हूँ मैं, मेरीं असमर्थता दूर करनें का सामर्थ्य तुझमें ।
fिदल की हर तरंग पे नाम है तेरा, बांवरा बना फिरता मैं ।
हलाहल पिना पड़े तेरे लिये हूँ तैयार मैं कोई भी क्षण बिन गवायें ।
तेरा साथ रहने के लिये, अनुरूप बन जाना चाहता हूँ तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह