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Hymn No. 385 | Date: 27-Sep-1998
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भाग रहा है मेरा दिल तेरी गलीयों में बार – बार, गाहें – बगाहें उद्धत हो उठता हूँ, तुझसे मुलाकात के लिये, परवाह ना है उसको कीसी बात की, सौ बात की एक बात है;
भाग रहा है मेरा दिल तेरी गलीयों में बार – बार, गाहें – बगाहें उद्धत हो उठता हूँ, तुझसे मुलाकात के लिये, परवाह ना है उसको कीसी बात की, सौ बात की एक बात है;
मेरी हो जाये कैसें ना कैसें मुलाकात तुझसे । शुभ होनें को तो रोज कुछ ना कूछ होता है शुभ;
पर तुझसे मिलना ही है हमारे जीवन का सबसे बडा शुभ; आँख – मिचौली तू खेलें हम सबसे, हैरान होता है मेरा दिल। तेरी हर हरकत को समझ ना हूँ पाता मैं, इस में बीत जाता है मेरा दिन,
जब पतली हो जाती है हालत मेरी बागवार से नागवार क्षणों में,
उबरता हूँ तेरा नाम लेकें, हर बात पे दिलासा दिलाता हूं दिल को तेरे जाम का।
जब तक आजाद था मेरा दिल भटका बहुत ही यहाँ – वहाँ पर खुश ना था मैं,
आज तेरी गुलामी करना चाहता हूँ आता है इसमें हमको बहुत ही मजा।


- डॉ.संतोष सिंह