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Hymn No. 399 | Date: 06-Oct-1998
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तू प्यार है निर्मल – निश्चल, प्यारा जग नहीं प्यारा तू हें ।
तू प्यार है निर्मल – निश्चल, प्यारा जग नहीं प्यारा तू हें ।
तेरा बनायें हुओं का इक् हद् है, तोड़ देता है तू सारी हद्दों को।
तू हीं इक् शाश्वत, ये संसार सारा है नश्वर । तू ही उपजाये सब कूछ, समेंट लेता है खूद में ।
मनमानी ना चलें तेरे आगें कीसीकी, फिर भी तू चलनें देता है ।
सब कूछ है पता तूझे, तू रमता है अपने में ।
वश में करने की तूझे सोचते है सब अपने, पर वश में रखता है तू सबको अपने ।
रूप धरकें आता है तू जाने अंजाने संतो का।
तू परवाह ना है करता, कीसकें परवाह की।
तू बेपरवाह रहके जीता है चाहें कहीं भी रहे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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कर दें हमें मुक्त पूर्वाग्रहो से, प्यार कर लेंगे सभी को तूझे समझकें।
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