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Hymn No. 402 | Date: 07-Oct-1998
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तेरे दर का इक् इक् कोना करेंगे साफ अपने आसुओं की बुंदों से।
तेरे दर का इक् इक् कोना करेंगे साफ अपने आसुओं की बुंदों से।
दिल के टुके करूंगा हजार, जहॉं पड़ेंगे कदम तेरे, बिछाऊँगा मैं वहाँ पे उसे।
थोडी सी इनायत करना तू रख देना तेरे श्री चरणों के तर जायेगा यें अभागा।
भाग्य में तू ना सही, पड़ जाये छाप तेरे श्री चरणों को दिल पे, जी लेंगे अमिट याद लेकें है।
दामन जो तेरा पकडा है, ना छोड़ेंगे चाहें कई - कई बार कटकें गिरता रहे यें तन।
तू दे या ना दें हमें कुछ, हम तो तेरे सायें में दिन गुजारना है चाहते।
इस जग में कहीं ना मिला सकून दिल को, जो तेरे दर पे आकें मिला।
हालत हो जाती है बड़ी खराब, जब दिल में अहसास ना होता है तेरे साथ का।
बड़ी – बड़ी बातें ना करना चाहता हूँ, जो तू कहलाता है वो कह जाता हूँ तुझको।
तेरी हर सजा कबूल है हमें, कृपा कर इतना सजा का हर पल गुजारूं दिल में बंद करकें तूझे।


- डॉ.संतोष सिंह