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Hymn No. 403 | Date: 07-Oct-1998
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तेरे संग जब तक है रहतें, हर पल लगता है उमंगो भरा ।
तेरे संग जब तक है रहतें, हर पल लगता है उमंगो भरा ।
दिल इतना है उमंगो से भर जाता, बुरी से बुरी हालत से उबर जातें है हम।
कूछ ना है तू है करता, मुस्कूराता सदा बैठें – बैंठे, पता नहीं कैसे घट जाता सब कूछ मनमाफीक तेरे।
रीवाज तो बड़ी पुरानी है, तूझे मनानें के लिये हम लोग क्या – क्या ना है करतें
हसंता होगा तू हमपे, इतना करकें तेरे अनुसार एक पल को ना है चलतें ।
ऐं।़।़ दयालु पिता यें जग का इक् – इक् कोना है तेरा घर, फिर भी तू हम अच्छें बुरे के रहनें देता है अपनी मर्जी अनुसार ।
मैं – मैं करकें करम करते है हम, तू नरम दिल है इतना हमारें करमों का भार तू हें उठा।
तू चाहता है इतना हमें साथ बिठाने को, पता नहीं क्यों हमारा मन लगता है विषयों में।
जीवन में मिली सफलता का श्रेय लेते है खुद असफलता मिलतें हा rदोष देतें है तूझे ।
प्रिय तेरे करीब आना हूँ चाहता, सब कूछ रहके उदास रहता है मेरा दिल तेरे लिये।


- डॉ.संतोष सिंह