VIEW HYMN

Hymn No. 413 | Date: 10-Oct-1998
Text Size
सब होता है, सब होता है, समय पे सब होता है ।
सब होता है, सब होता है, समय पे सब होता है ।
क्यों रोता है, रोनें से ना कोई काम होता है, समय पे सब होता है ।
धैर्य चाहीयें हर काम के लिये, धैर्य के लिये संतो का सत्संग चाहीयें ।
हर आशा निराशा में है बदलती, कोरी आश के बदलें तू रख विश्वास।
विश्वास से किया हुआ हर काम समय पे होता है ।
समय बदलते देंर नही लगती, दुनिया वहीं की वहीं है रहती।
तू भी ना बदलता, ना ही लोग है बदलतें, बदल जाता है तो सिर्फ समय।
समय का फैर है जो लोग लांखों करोडाsं है कमाते, पर भर मे है गंवातें ।
समय नित्य है, गुजरना पड़ता है हम सबको सारें संसार के संग ।
समय प्रभु का रूप है, संतो के दिलों का धडकन है समय।
जो रच – बस गया समय में, ढल जाता है अनुरूप समय उसकें।


- डॉ.संतोष सिंह