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Hymn No. 415 | Date: 11-Oct-1998
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मन मेरा में कहता है, तुझसे सदा बस जा तू हमारें दिल में,
मन मेरा में कहता है, तुझसे सदा बस जा तू हमारें दिल में,
दीवानें को परवाह ना होती है कीसी बात की, प्यार में पगलायें से रहते है ।
रजा ना होगा कीसी बात का, क्षण मात्र के लिये चूम लूं तेरे चरण को,
होश में ना रहना चाहता हूँ, अपने बस तेरे सपनें देखना चाहता हूँ ।
मुझे परवाह ना है अपना, अपने लापरवाही में तेरे दर का चक्कर लगाना चाहता हूँ ।
पल भर कें लिये राहत मिल जात है, जो एक बार दीदार हो जाता है तेरा ।
चाहत मेरी बडती जा रही है, रोक ना सकूंगा अपने आपको कीमत पड़ा चुकाना जाँन करके चुकाऊंगा।
हर धून फीकी है तेरे सामनें, मुझपे जो चढ गयीं है धून तेरी ।
हर वो पल है खट्कता जिन पलों में दूर रहते है हम तुझसे ।
सौ बात की एक बात मुझपे चढ गया है नशा तेरा, जो ना कभी उतरता।


- डॉ.संतोष सिंह