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Hymn No. 418 | Date: 13-Oct-1998
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मेरे हसीन क्षण है वो, जब खोया रहता क्यूं मैं तेरे पहुलं में ।
मेरे हसीन क्षण है वो, जब खोया रहता क्यूं मैं तेरे पहुलं में ।
होश ना रहता है मुझे अपना और कीसीका मगन रहता है तुझमें ।
इस जीवन का हर पल यादगार है वो जो गुजारें गये है तेरे संग ।
मेरे दिल से आती है खुशबू तेरी भीनी – भीनी, खोयें रहते है हम उसमें ।
तेरी बात करनें में जो आता है मजा, वो मजा कहीं और नहीं ।
खुशी और सुखी में तब तक हूँ, जब तक हूँ संग तेरे ।
तुझसे दूर होना ही मेरे लिये है सबसे बड़ी सजा ।
मन और दिल दोनों में से कोई एक भटकता है तेरे दर पे ।
कोई और ठिकाना ना है मुझे गंवारा, मुझे तो है तूझे अपना बनाना ।
सता तू मुझे कीतना भी, पर अपने हाथों से तू मुझे सताना ।
मेरा हर बहाना है तेरे लिये, तेरे पास आने को बैचेन रहता दिल मेरा।
तेरे बिन ना कबूल है मुझे कुछ भी, हर क्षण तू हरें हमारा।


- डॉ.संतोष सिंह