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Hymn No. 419 | Date: 14-Oct-1998
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प्रभों तू हर लें हमारें मनोविकारों को, निमग्न रहूँ में तुझमें ।
प्रभों तू हर लें हमारें मनोविकारों को, निमग्न रहूँ में तुझमें ।
तेरे ख्यालों में इतना डूबा रहूँ, अहसास ना हो हमें जिवित होनें का।
दिल की हर धडकन पे अनवरत नाम हो तेरा ।
अलमस्त होके मैं तेरी मस्ती में डूबा रहूँ ।
इस जीवन में जो कुछ भी घंटे, घटता रहे, तेरी बेफिक्री छायीं रहे मुझपे ।
तेरा साथ – साथ होनें के अहसास से, रोम – रोम आनंद में रहे तेरे।
पास रहे कोई भी मेरे प्रभु हर पल करीब तू रहे मेरे ।
साथ छुटता है कीसीका तो छुट जाने दें, पर तेरा साथ ना छुटें कभी ।
करता रहूँ कोई भी काम, तूझसें मुलाकात के वास्तें छोडके सब कुछ दौड तेरी ओर।
तूझें पाने के लिये सह लुंगा सब कूछ चाहें छोडना पड़े दम ।


- डॉ.संतोष सिंह