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Hymn No. 420 | Date: 15-Oct-1998
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निश्चिंत हो जान चाहता हूँ, तेरा दामन पकडके।
निश्चिंत हो जान चाहता हूँ, तेरा दामन पकडके।
जो तू कहेंगा, वो हम करेंगे, बिना कोई शक के ।
तू इतना करना, हमारें विश्वास को बडाते जान ।
श्रध्दा के सागर में प्रेम की नैय्या को खैंया करेंगे ।
वासनाओं की आँधीयाँ आती है तो ना डरेंगे ।
अपने नैय्यां के लंगर तेरे हवालें कर देंगे ।
इच्छाओं के ज्वार – भाटे चलते रहते है सागर में ।
हम तेरे गीतो के पतवार के सहारें तीरतें रहेगे ।
कीनारें की चाह ना है हमें, हर पल खोयें रहे तुझमें ।
कोई क्याँ कर लेगा हमारा, जब हम सो जायेगे तेरे पहलू में।


- डॉ.संतोष सिंह