VIEW HYMN

Hymn No. 421 | Date: 15-Oct-1998
Text Size
माफ करना ऐं पिता कभी – कभी लडने का मन करता है तुझसे ।
माफ करना ऐं पिता कभी – कभी लडने का मन करता है तुझसे ।

ढेर सारें सवाल उभरतें रहतें हें हमारें मन में सब का जवाब मांगते है तुझसे ।

क्यों ऐसा हो जाता है खोना चाहता हूँ तुझमें, खो जाता हूँ अपनी इच्छाओं में

दीदार किया तेरा कई बार, क्यों अब भी तेरा दीदार को तरसता है मन मेरा ।

मैं गाता रहूँ तेरे गीत हर पल, क्यों मेरे गीत के बोल है बदल जातें ।

पता नहीं क्यों ऐसा लगता है किं तू करता है दिल्लगी हमसें ।

निशंक होके तेरे अनुरूप बनकें तेरे करीब चाहते है रहना ।

कब मन के भाव जाते है बदल, असहाय से देखतें है खुदको ।

पुकारना बंद ना होगा पिता, आज नहीं कल तूझे बदलना होगा हमें जरूर ।


- डॉ.संतोष सिंह