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Hymn No. 423 | Date: 15-Oct-1998
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मत रोक अपने आपको बह जाने दें उसकी धुनों में ।
मत रोक अपने आपको बह जाने दें उसकी धुनों में ।
छेड रखी है तान अनोखी, बेसुध होता है तन – मन तो हो जाने दें ।
रोकेंगा तू सतायेगा अपने आपकों, छोड दें उसके मौजों के सहारे।
जितना तू अपने मन की करेंगा, गरत में डुबता चला जायेगा।
आनंद इतना आयेगा उसके सामनें हर खुशी झुठी नजर आयेंगी ।
रूठें हुये भी खिलखिला उठतें हें पास जाकें उसके ।
सब कूछ पालेंगा इस जीवन में, पर दिल उचटता रहेगा सबसे ।
एक बार दिल को तू जोड लें उससे, जीवन का हर पल मधूर बन जायेगा ।
तोड़ दें तू आज हर बंधन को, उससे बंधता चला जायेगा।
खोया हुआ वक्त न आता हें पछतानें से ना कूछ होता है ।
कूछ ना करना है, बन जान है मीत उसका।
जो तू ना कर पाया है, वो पल भर में कर दीखायेंगा ।


- डॉ.संतोष सिंह