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Hymn No. 424 | Date: 16-Oct-1998
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देखं सुन रखा है बहुत कुछ, अब जाननें का वक्त आ गया तेरी कृपा से ।
देखं सुन रखा है बहुत कुछ, अब जाननें का वक्त आ गया तेरी कृपा से ।
उन राहो से गुजरें थें एक नहीं हजारों हजार बार, पुरानी यादें हो गयी है ताजा।
प्रियतम् तू एक था, दिल लगाते – लगातें कहीं और लगा बैठे, कई जीवन को जला बैठें ।
निश्चिंत हूँ मैं पकडा हूँ जो राह तेरा, जहाँ – जहाँ से गुजरना पड़ेगा गुजर जायेगे लेकें नाम तेरा।
क्या सम्भलना, क्या गिरना बेसुध हो जान है तेरी यादों में जिस हॉल में तूझसें कबूल है हम ।
पल – पल जैसे गुजरता जा रहा है, इस नाचीज के दिल में मांग बढती जा रहीं है तेरी ।
सह लूंगा अब सब कूछ मैं, यें तन – मन और दिल जो हो चूका है तेरा ।
अपना अब कूछ नजर नहीं आता, हर पायें में तेरा रूप है नजर आता ।
तेरे पास आकें जान हमनें कुछ भी अलग ना है तुझसे अस्मभव भी सम्भव प्रतीत होता है ।
प्रीत बडती जाये तेरे प्रति, मेरे मन में बैठा दुनिया का हर डर निकल जायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह