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Hymn No. 425 | Date: 18-Oct-1998
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लगा बैठे है दिल हमनें एक पत्थर दिल वाले से ।
लगा बैठे है दिल हमनें एक पत्थर दिल वाले से ।
जो ना करें कभी अपने प्रेम का इजहार, पर आँखों में तैरती है करूणा उसके ।
ज्ञानी वो बहुत बडा, उसकें ज्ञान के आगे फीकी है दुनिया का ज्ञान ।
हिला नहीं सकता कोई उसे, ना ही दुनिया का कोई सम ठिगा सकता ।
इंसान के रूप में आया है, साधारण सा जीवन जीवन जीतें हुये असाधाण कार्य करता है।
उसके भाव खुद के लिये है, निमग्न रहता है खुद में।
अपनी खुदाई से करता है हर पल लोक कल्याण, दिखावें से दूर रहके ।
प्यार ही प्यार में हमारीं कथनी – करनी में भेद दिखाकें सबक सीखाता है वो ।
कभी – कभी जानते हुये हमें हर पल क्यों वो परखता है।
बेसबरा हो रहाँ हू मैं तेरे लिये, या तू मुझे धीर दें, या तो मुझे समेंट लें अपने में ।
तू हमारा ही नही सबका परम् परमात्मा है, नाम हजारों है तो क्याँ तू एक है ।


- डॉ.संतोष सिंह