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Hymn No. 427 | Date: 19-Oct-1998
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जलातें है घी का दीप तेरे सामनें हम रोज ही,
जलातें है घी का दीप तेरे सामनें हम रोज ही,
इक् बार तू जला दें हमारें दिल में तेरे प्यार का दीप ।
उसकी रोशनी में देखेंगे हम तूझे और तेरी दुनिया को,
हर कीरन पे होगी तेरा नाम ।
दूर रहेगे हम तुझसे, हर पल याद दिलाती रहेगी,
मेरा हर पल रोशन होगा, हम तेरे बन जायेगे।
हमारें ज्ञान का उदय होगा उसकी रोशनी में,
रोशन होगे हम अंदर और बाहर से उसके सहारे।
जीवन के हर मोह को देखा करेंगे उसकी रोशनी में,
राह का हर हिस्सा पार कर जायेगे उसके सहारें ।
आयेंगे कीतनें आँधी और तूफां इस जीवन में,
दिल रोशन होगा तो पार हो जायेगे, टूटा हुआ तन – मन को साथ लेकें ।
घी का दीप कई बार जलायें तेरे आगे,
इस बार दिल का दीप जलाकें रख दूं दीदार के वास्तं तेरे सामनें।


- डॉ.संतोष सिंह