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Hymn No. 428 | Date: 19-Oct-1998
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प्रभु जब हम होतें है तेरे सामने, गुम हो जाता है होश हमारा ।
प्रभु जब हम होतें है तेरे सामने, गुम हो जाता है होश हमारा ।
कभी तिलक लगातें है तेरे माथें पे, तो भूल जाते है बत्ती करना ।
प्रार्थना करतें – करतें भूला बैठतें है फूल चढाना तूझपे ।
क्यों हम तंद्रा में चलें जातें है, हमारी निगाहें तो तूझपे रहती है ।
सुकून मिलता है दिल को, जब गीत सुनातें है हम तुझको ।
बंद आँखों में तसवीर उभरती है तेरी, तन के बंधन को भूला बैठते है हम ।
कृपा रखना तू हमपे इतना, ना रखे हम कोई दूराव – छिपाव तुझसे ।
नम् आँखों की दो बूंदे अर्पीत करके, नमन् करता हूँ मैं तेरी ।
इक् छोटी सी अनुरोध है हमारी, प्रभु तू बसना सदा दिल में हमारें ।
भूल जाये हम तूझे, पर तू ना भूलना कीसी ना कीसी बहानें याद दिलाते रहना तेरी ।


- डॉ.संतोष सिंह