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Hymn No. 429 | Date: 19-Oct-1998
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मन के अंधियारें को दूर कर दें, प्रभु गुलजार हो जायेगा जीवन मेरा ।
मन के अंधियारें को दूर कर दें, प्रभु गुलजार हो जायेगा जीवन मेरा ।
हर पल बीतेगा तेरे संग, होगा तू मेरे दिल के करीब इतना ।
इस गरीब की बस एक है तमन्ना, बनकें मुरींद मैं तेरा गुजारू जीवन मेंरा ।
तेरा मिलना है खुशी मेरी, तुझसे जुदा होना सबसे बडा गम है मेरे लिये ।
मैं कैसे तुझसे कहूँ, जो कुछ भी बनना पड़े तेरे वास्ते हूँ तैयार मैं हर पल ।
कूछ भी करकें कैसे भी, इस जीवन में हर पल तेरे करीब रहना हूँ चाहता ।
काबीलीयत ना है मेरी इतनी, तेरी कृपा होगी तो संग मिल जायेगा तेरा जरूर।
जन्नत जाके क्या करूंगा, जब तू वहाँ होगा ही ना, कीसी सजा से कम ना होगा ।
मन मगरूर रहता है में – मैं यें, दगा दे जाता हूँ में तूझे और खुद को ।
तन – मन और इस दिल को अर्पित कर देना चाहता हूँ तेरे चरणों में तूझे अपना बनानें के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह