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Hymn No. 431 | Date: 21-Oct-1998
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नववर्ष का शुभारंभ हुआ, प्रभू तेरे श्री चरणों कों हम सष्टांग प्रणाम ।
नववर्ष का शुभारंभ हुआ, प्रभू तेरे श्री चरणों कों हम सष्टांग प्रणाम ।
इक् इक् पल हम तेरा बनकें जाये, आशीष रहे सदा हमपे तेरा।
इस दिल को तू भर दें विश्वास से लबालब, टूटें मेरा मन सबसे ना तुझसे ।
अमिट हो मेरा प्यार, मिटें चाहें में तन बार – बार, पर प्यार मेरा अटूट रहे तुझसे ।
श्रध्दा हो हममें इतनी, सुध में रहे या बेसुध, बस हमें तेरा ख्याल हो।
तेरे नाम को अपने रोम – रोम में बसा लूं, इस तन-मन में कूछ ना बस पायें सिवाय उसकें।
जग चाहें छुटें या रूठें, प्रभु तू हमसे विमुख कभी ना होना ।
सहारा तुझसे इतना हूँ मांगता, तेरे बतायें राह पे चल संकू मैं ।
कोई भी अवसर आये इस जीवन में सहजता से रमा रहूँ मैं तुझमें ।
बेफिक्री छायीं रहे मुझपे इतनी, गोया कोई ना है बस हम ही तूम है ।


- डॉ.संतोष सिंह