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Hymn No. 432 | Date: 21-Oct-1998
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बगावत करना चाहता हूँ सबसे, तेरी इनायत के लिये ।
बगावत करना चाहता हूँ सबसे, तेरी इनायत के लिये ।

बस प्यार ही प्यार करना चाहता हूँ रिश्ता हो या ना हो ।

अपने आपको फूल बनाकं चढादेना चाहता हूँ तूझपे ।

तेरे रहमों – करम से गुलजार हो चुका है मेरा हर पल ।

नाचीज सेंप दें खुदको या जुटायीं हुयी सारी दौलत को ।

हकदार ना हो पाता हूँ मैं तेरे कदमों की धूली के कन् को ।

जोश में आकें, होश खोकें, बात कहं जाता हूँ बड़ी – बड़ी ।

माफी के लायक ना है यें बडबड़ी, हौलें से तू मारना अपनी छड़ी से ।

खाँबो देखता हूँ बहुत सारी गुजर जात है सारी रात ।

सच कहता हूँ हर ख्वाबों में मैं तूझे ही पाता हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह