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Hymn No. 433 | Date: 22-Oct-1998
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बदलेगा यें जमाना, ना बदलुंगा मैं, चढा जब रंग तेरा, दूजा रंग ना चढनें दूंगा ।
बदलेगा यें जमाना, ना बदलुंगा मैं, चढा जब रंग तेरा, दूजा रंग ना चढनें दूंगा ।
सदा तेरी कृपा रहे गोता लगाता हूँ आज मैं तुझमें, कल तेरे अनंत साम्राज्य में गोता लगाऊँ ।
खोया सब कुछ जब तुझको पाया, दिल ने झाका तेरे आंखो में सच्ची प्रीत को जान हमने ।
तन थकता है मन भटकता है सदा, तेरे प्यारे भरे आशीष से मूक्त कर लूंगा दिल को सबसे ।
विषय – विकारों को है उपजाती, तन – मन गोता लगातें उसमें, नादांन दिल सजा पाता सदा।
मुक्त होना है इन सबके संग रहके, उपर उडे वों शाश्वत आनंद का पान करेंगे सदा।
अच्छी बूरी ना हठ करता हूं तुझसे कोई, तेरे अनुरूप ढल जायेगे हम संग रहके तेरे ।
तडप और पानें को है मोडना, दिल में छलके जाम तेरं लिये, मन को पीना पड़ेगा।
पाकें झूमेंगे यें तन मन को भूलाकें खत्म होगा हर भेद भाव, बांवरा बनकें नाचेंगा दिल मेरा।
खांई में गिरा या बहतें पानी में बहा, हर डर को भूलाकें तेरे संग संग झूमा करेंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह