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Hymn No. 434 | Date: 22-Oct-1998
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ठुकरा दें यें जमाना सारा, उफ् तक ना करेंगे हम ।
ठुकरा दें यें जमाना सारा, उफ् तक ना करेंगे हम ।
हमारीं कीसी बात से ठेस लगें तूझे, तो सहेंगे जमानें भर की सजा।
डरता ना हूँ मैं कीसी से, ना मिटनें का कोई है गम ।
पर तुझसे अलग होनें का खाब तडपा जात है हमें भीतर तक ।
मैं कुछ और ना हूँ चाहता, अट्टू प्रीत के बंधन में बांधना चाहता हूँ तेरे।
सब कुछ पाया मेंने कई - कई बार, बस एक बार तूझे पाना चाहता हूँ ।
तेरे अनंत साम्राज्य से लेना चाहता हूँ बहुत कुछ ।
पर छोलें भरकी कीमत ना है उनकीं तेरे सामनें ।
बहुत सी कमीयाँ है हममें, भूल पे भूल करते रहते है ।
सब कुछ जानते हुये छोड नहीं पातें हम, दया करके शरण दे दे हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह