VIEW HYMN

Hymn No. 436 | Date: 25-Oct-1998
Text Size
कर कृपा तू हमपे इतनी, चख लें तेरे प्यार की दो बूंद हम ।
कर कृपा तू हमपे इतनी, चख लें तेरे प्यार की दो बूंद हम ।
मस्ती में आ जायेगे हम, तुझमें मगन होके झुमुंगा दिन – रात ।
चलेंगा दौर प्यार – भरें गीतों का, दिल साराबोर हा जायेगा नशे में ।
थोड़ी चुहलबाजी कर लेंगे हम तुझसे, दोष लगा देंगे नशें के सर पे ।
हर नशा चढके उतर जाता, तेरा नशा ना चढायें है चढता, ना उतारें उतरता।
इस महरूम पे तेरी इनायत है, जों दिलको डूबायें रहता है तुझमें ।
मैं लोफर कई - कई घाट का हूँ पानी पीया तेरी कृपा से चला आया तेरी ओंर।
डूब जातें है तो जाने दे हमें जों ठिकाना मिल गया है दर पे तेरे ।
तूझे पाने का सरूर छाया रहे हमारे आँखों के संग – संग दिल में ।
हर पल बढता जाये जैसे दिन दुनी रात चौगुनी, आंख मुदंती है तो मूद जाये ।


- डॉ.संतोष सिंह