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Hymn No. 437 | Date: 29-Oct-1998
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मेरे हर स्वप्न में जुड़ा है तू, तेरे बिन् अधुरें है हम।
मेरे हर स्वप्न में जुड़ा है तू, तेरे बिन् अधुरें है हम।
तू अनंत ब्रह्माण्ड का शाश्वत सुर्य, तेरी लघु कीरन् है हम ।
तेरे साम्राज्य में समाये है एक में एक वैभवशाली इद्र ।
ना कमीं है शुरवीरों की, ज्ञान का अतूल भंडार लिये है ज्ञानीजन।
भरे पड़े है उनकों अनेक बहुमुखी व्यक्तित्व वाले रत्न ।
महिमा जिनकीं कोई ना कर सकता बखांन, पुंजे जातें है तेरी कृपा से ।
तेरी कथा कहनें के लिये मेरी कोई बिसात ना है ।
चमड़े की जिव्हा से, फटीं हुयीं आवाज लेकें मैं क्याँ सुनाऊँ तूझे ।
तेरी दयालुता है हमपे, चरणों में तेरे शीश नवानें का मौका दिया तूने।
सुनाया तूने सच्चे ह्रदय वाले अनेकों अनेक संतो की कथा।
कई - कई जनम बीत जाये तेरी सेवा में उतार ना सकता ऋण तेरा ।
ये दयालु कर दें अब इतनी कृपा, रस लें तेरी चांकरी में आजन्म मुझे ।


- डॉ.संतोष सिंह