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My Divine Blessing
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Hymn No. 441 | Date: 26-Oct-1998
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अवसर देता है तू हमें, एक बार नहीं सौं – सौं बार।
अवसर देता है तू हमें, एक बार नहीं सौं – सौं बार।
हर बार कहीं ना कहीं हम चूक जाते है जरूर।
जब से तन – मन से जुड़ा हूँ, दोहराते चलें गये गल्तियों को।
आसार कोई नजर नहीं आवें, हर कर्मों के रास्तें दूर लें जातें है तुझसे ।
प्रभु सींच दें हमारें मन को तेरे प्रेम से ।
दिल कुंदन करता हुआ कातर स्वर में पुकारा करेंगा।
तू तो है अनंत ब्रह्माण्ड का सम्राट, तूझे कुछ ना पढी है ।
हम तेरे सबसे क्षुद्र दास, तर जायेगे तेरी कृपा पाकें ।
अनेकोनेक ज्ञानीजन करतें तेरी बखान, प्रेमीयों के प्रेम ने धांम रखा है तेरा है।
मैं मुरख असंख्यो में एक, कर ना पाया कुछ आत्मसात, जानतें हुये सब कूछ तोड़ दें तू मेरे तन – मन कें हर बंधन को ।
कहें मोहें कोई कुछ भी, बन दीवाना दर – दर भटकू मैं तेरा दर समझकें।
- डॉ.संतोष सिंह
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परवाना बनकें फिरूं चारों ओर तेरे, खाक होना पड़ा तो हो जायेगे बनकें तेरे ।
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