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Hymn No. 449 | Date: 29-Oct-1998
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त्याग ना देंगे जब तक हमारें अहम् को,
त्याग ना देंगे जब तक हमारें अहम् को,
तब तक क्यों कर होगा प्रभु का दर्शन हमको ।
भेद है हमारें दिलों में प्रभु के लिये, खडी है दीवारें मन में ।
त्यागना पड़ेगा उसको अपना बनानें के लिये, हर दीवारों को तोड़ना होगा ।
अच्छा कहलानें से अच्छा ना हो जातें है हम, दिल सच्चा होना है जरूरी,
दिल को सच्चा होनें के लिये प्रभु का वाश चाहियें अंतर में ।
बिना झुकें झुका ना सका है कोई, प्यार की अंतहीन गलीयो म।
बनकें बावरां घूमना पड़ेगा, तब जाकें होती है मुलाकात उससे ।
काँटों का ताज पहनना आसान है, उसकें बतायें राह पे चलना मुश्किल
सहारा लेना होगा उसका ही हर क्षण उसका बनके रहना होगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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झोकें ना तू मुझे मेरे कर्मों के संसार में, बन जाऊँ मैं तेरे जग का इक् अभिन्न अंग
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भेद बहुत करता है हमारा मन, उलझ जाता है तेरी अलग – अलग छवी में ।
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