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Hymn No. 450 | Date: 30-Oct-1998
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भेद बहुत करता है हमारा मन, उलझ जाता है तेरी अलग – अलग छवी में ।
भेद बहुत करता है हमारा मन, उलझ जाता है तेरी अलग – अलग छवी में ।
सुलझाता है दिल जो तूझे एक ही मानता, उस एक को ढूँढ़ता है हर जगह ।
नजरों के सामनें से माया की पट्टी हटा दें तू, वास्तविक तेरे स्वरूप का दर्शन करें हम।
बिना कीसी रिश्तें के प्यार बस प्यार करतें रहे हम तूझे, सुबह हो या शाम ।
तेरे नाम का जाम पीतें – पीतें गुजार दें जीवन के हर पलों को ।
अतीत हमारा हौ काला, भविष्य की फिक्र ना है, वर्तमान में तेरे चरणों की धूल बन जाने दे।
मेरी हर आश का तू मिटा दें, ना हूंगा कभी निराश मैं, बस साथ हो इस दिल को तेरा।
सतत् हम तुझमें खोयें रहे, खोये ही तेरे गीतों को गातें रहे ।
काश् नहीं प्रिय तू हमारे साथ है, हमारा यें पूलावी ख्याल को तू तोड़ना ना कभी।
दम जब तक रहेगा मुझमें, हम पुकारेंगे तेरा ना ले लेंके भले तू साथ हो हमारें ।


- डॉ.संतोष सिंह