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Hymn No. 452 | Date: 31-Oct-1998
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आओं हम सब मिलके करें उस परम् पिता की प्रार्थना जो नीलें आकाश में है रहता ।
आओं हम सब मिलके करें उस परम् पिता की प्रार्थना जो नीलें आकाश में है रहता ।
दूर हमनें खूद को उससे किया है, वास हौ उसका दिलों में हमारें ।
मंदिर – मस्जिदों में जा – जाकें कई बार खोजा है हमनें उसे, दिल में झाकनें की फूरसत ना है हमें।
भीड़ में रहना है पसंद हमें, भीड़ से जुदा होके कभी ना गये करीब उसकें ।
अकेलें जो गया पास उसकें रहा वो सदा संग उसकें, अचछा प्रेमी ज्ञान से भरा रूप दिखाया उसनें।
जो बच गया उससे वो भूला हर बंधन को, रास न आये उसे उसके बिना कूछ।
उसके संग के सुख का वर्णन ना कर सकतें हम, बहुत धन लुटाकें पा नहीं सकतें ।
निरानंद होके भी वो आनंदमय है, कोई भी वैभव ना है संसार का, फिर भी सुखमय है वो ।
- डॉ.संतोष सिंह
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जगत पिता तेरी वंदना करता हूँ कई कई बार, तेरी कृपा है जो तूने दिया है हमें बहुत कुछ ।
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कभी मन में यें, कभी मन में वो, इसी में बीत जाता है जीवन का हर पल ।
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