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Hymn No. 460 | Date: 06-Nov-1998
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बन जाने दें प्रभु मुझे बांवरा, विचरता फिरूं तेरे जग में नाम लेतें तेरा।
बन जाने दें प्रभु मुझे बांवरा, विचरता फिरूं तेरे जग में नाम लेतें तेरा।

अनाड़ी कहलाऊँ हर काम में फिकर ना मुझे तेरा नाम गुनगुनाऊँ सब भुलाके।

सुध ना रहे मुझे मेरा और कीसीका, बोध होता रहे तेरे न होनें पे तेरे होनें का।

बहुत निभाया हर रिश्तें – नातें को, सब को निभातें हुये तेरे – मेरे बीच के रिश्तें को निभाऊँ।

हर तन के संग बदला है हर रिश्ता – नाता, परम् ना बदला है ना बदलेंगा तेरा मेरा रिश्ता।

बहुत से कीस्से बहुत बार गुनगुनायें, अब सब कुछ भूलाकें तेरे गीतों को गुनगुनाऊँ।

बदल रहां है हर हरपल में जग का हर कन, मैं और तू बदलें, पर हमारा साथ कभीं ना छूँटे।

हालात से किया है कई बार समझौता, अब इस दिल में बसनें का तू कर लें समझौता।

सब कुछ सह जाऊँगा, तुझसे जुदा होना पड़ा तो त्याज देगें इस प्राण को कई कई बार।

बस इक् बार तू हमें तेरे चरणों की धूल बन जाने दें, कीस्मत् हमारी सवर जायेगी।


- डॉ.संतोष सिंह