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Hymn No. 462 | Date: 07-Nov-1998
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आज तक तेरे साथ रहके तेरी हर बात सुनतें हुये अनसुना करतें रहे तूझे ।
आज तक तेरे साथ रहके तेरी हर बात सुनतें हुये अनसुना करतें रहे तूझे ।
दिल पर से परदा उठा दिया है तूने, कहना कूछ ना है, मुझें चलना है तेरे बतायें राह पे ।
आती रहे अनेकोनेक बाधायें राह में, बिना डरें पार करेंगे उन्हें लेकें नाम तेरा।
मंजिल क्या हँ कूछ ना पता होगा, मुझे परम् विश्वास के संग चलतें रहेगे बतायें तेरे राह पे।
प्रेम का जाम पे जांम पीतें जायेगे, समय का ध्यान होगा, हम तुझमें खोकें बडतें जायेगे।
मुलाकात के लिये तुझसे तरसें कोई और, हमारें साथ तू तो हर कदम पे होगा।
जो होगा देखा जायेगा, दिल का हर ज्ञान अच्छें – बूरें का मिटता जायेगा बस मजा आयेंगा।
एक पल ऐसा आयेंगा आगे बडना, पीछे हटना कूछ ना होगा, चारों और तू ही तू होगा।
खोजना ना होगा तूझे तब अंदर – बाहर, उपर नीचें तू ही तू होगा, हमारें मिटने का ना कोई सवाल होगा।
कहनें सुननें की तब बात ना होगी, बिछुडने – मिलनें से पहलें मौन परम ज्योत् होगा सर्वत्र ।


- डॉ.संतोष सिंह