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Hymn No. 463 | Date: 08-Nov-1998
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सरकता जा रहां है जीवन हमारा हर पल इस संसार से।
सरकता जा रहां है जीवन हमारा हर पल इस संसार से।

रूक जा सना है कोई जो आज आया है उसे जान है जरूर।

मोह रहता है तन का तन से जुड़े रहतें है रिश्तें नातों का बंधन ।

मुक्त रहा है वो जो दिल की गहराई में उसकें, परम् कें कदमों को चुमाँ है ।

टाँलनें और निभानें के बीच व्यतीत होता रहता है जीवन हमारा ।

अधुरी चाहत से अधुरा मार्ग तय कर पातें है, दम का साथ छुट जाता है ।

लगन हो सच्ची रूक नहीं सकतें आधें – अधुरें मार्ग में, कदम हर पल बडतें है ।

ख्यालों में जा नहीं सकतें, हर कर्म को कर्तव्य मानकें निभाना होता है ।

सच्ची – सच्ची बात यें है, अपने आपकों छोड उसकें हवालें निश्चित रहना पड़ता है ।

प्यार जो उससे किया सब कूछ सहकें, fिढा से खुशीयाँ मनानीं पड़ती है ।


- डॉ.संतोष सिंह